LPG Cylinder Price Hike ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग का असर अब भारतीय रसोई और आसमान दोनों पर दिखने लगा है। अप्रैल महीने की शुरुआत होते ही आम जनता और व्यापारियों को महंगाई का बड़ा झटका लगा है। खाड़ी देशों में जारी तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बाधित होने से कच्चे तेल की वैश्विक सप्लाई चेन चरमरा गई है, जिसका सीधा नतीजा घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में सामने आया है।
कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में जबरदस्त इजाफा
1 अप्रैल 2026 से देश के प्रमुख महानगरों में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में ₹200 तक की वृद्धि की गई है। दिल्ली में इसकी कीमत अब ₹2078.50 हो गई है, जबकि कोलकाता में यह ₹2208 के पार पहुंच चुका है। हालांकि, राहत की बात यह है कि घरेलू रसोई गैस (14.2 किग्रा) के दामों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे आम घरों का बजट सीधे तौर पर प्रभावित होने से बच गया है।
हवाई सफर हुआ महंगा: जेट फ्यूल की कीमतों में रिकॉर्ड वृद्धि
युद्ध के कारण केवल जमीन ही नहीं, बल्कि आसमान में भी महंगाई की आग पहुंच गई है। तेल कंपनियों ने विमान ईंधन (ATF) की कीमतों में लगभग 8.5% की बढ़ोतरी की है। दिल्ली में जेट फ्यूल की नई कीमत ₹1,04,927 प्रति किलोलीटर हो गई है। कोलकाता और मुंबई जैसे शहरों में भी कीमतें आसमान छू रही हैं। चार्टर विमानों और गैर-अनुसूचित ऑपरेटरों के लिए यह बढ़ोतरी 115% तक पहुंच गई है, जिससे हवाई यात्रा और लॉजिस्टिक्स खर्च बढ़ना तय है।
हॉर्मुज की घेराबंदी: दुनिया की 25% तेल सप्लाई पर खतरा
ईरान और मिडिल ईस्ट में जारी 33 दिनों की भीषण जंग ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है। ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को ब्लॉक किए जाने से दुनिया की लगभग 25% तेल और गैस सप्लाई रुक गई है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार की लाइफलाइन माना जाता है। इसके बंद होने से खाड़ी देशों में उत्पादन घट गया है, जिससे पूरी दुनिया में मंदी और ऊर्जा संकट (Energy Crisis) का डर सताने लगा है।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर युद्ध का चौतरफा असर
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है, इसलिए इस युद्ध का असर कई स्तरों पर देखने को मिल सकता है:
- माल ढुलाई की लागत: डीजल और सीएनजी की संभावित बढ़ोतरी से ट्रांसपोर्टेशन महंगा होगा।
- खेती पर प्रभाव: उर्वरक और रसायनों के उत्पादन में कमी आ सकती है, जिससे फसलों की लागत बढ़ेगी।
- औद्योगिक सुस्ती: फैक्ट्रियों को मिलने वाली गैस महंगी होने से उत्पादन धीमा हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा खिंचता है, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर लगा ‘फ्रीज’ हट सकता है। तेल कंपनियों पर अंतरराष्ट्रीय कीमतों का भारी दबाव है। अभी केवल कमर्शियल गैस और हवाई ईंधन के दाम बढ़े हैं, लेकिन आने वाले समय में सीएनजी (CNG) और पीएनजी (PNG) की कीमतें भी आम आदमी की जेब ढीली कर सकती हैं।
वैश्विक युद्ध की स्थिति में भारत जैसे विकासशील देश के लिए महंगाई को नियंत्रित करना एक बड़ी चुनौती है। सरकार ने फिलहाल घरेलू एलपीजी के दाम स्थिर रखकर आम आदमी को फौरी राहत दी है, लेकिन लॉजिस्टिक्स और कमर्शियल फ्यूल की कीमतों में वृद्धि अंततः खाने-पीने की चीजों और सेवाओं को महंगा बना देगी। मिडिल ईस्ट में शांति बहाली ही वैश्विक बाजार को स्थिरता दे सकती है।



